अब हम आर्टिकल में हम हिंदी साहित्य के आदिकाल के अंतर्गत रासो काव्य (raso sahitya) को पढेंगे , इस टॉपिक में हम रासो का अर्थ ,प्रमुख रासो. प्रामल रसो प्रेमचंद की रचना है जो 1930 के दशक की है।. परमाल रासो आदिकालीन हिंदी साहित्य का प्रसिद्ध वीरगाथात्मक रासोकाव्य है। वर्तमान समय में इसका केवल आल्हाखण्ड उपलब्ध है जो.
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• इस रचना को अंग्रेज चार्ल्स इलियाट ने आल्हा लोग (भाटों) गायकों से संग्रहित करके 1865 मे प्रकाशित करवाया गया था। इसमे आल्ह एवं उदल के. इस काव्य के 'महोबा खण्ड' को संवत 1976 वि. परमाल रासो आल्हा खण्ड के नाम से भी प्रसिद्ध है जिसकी रचना 13वीं शताब्दी में महोबा के राजा परमालदेव के सामन्त आल्हा और ऊदल की वीरता के वर्णन पर,.
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माता प्रसाद गुप्त के अनुसार यह रचना 16वीं शती विक्रमी की हो सकती है, किंतु इस पर मतभेद हैं।.